Monday, November 19, 2018

ईमानदारी की एक मिशाल

दिनांक 20 नवंबर 2018 स्थान: चित्तौड़'गढ़ उदयपुर राजमार्ग आज मैं विद्यालय भ्रमण के दौरान चाय पीने के लिए एक छोटी सी टपरी पर रुका | टपरी चाय की छोटी कच्ची दुकान को कहते हैं | मैं यहाँ पहले भी रुककर चाय पी चूका हूँ | बड़े से चित्रकूट रिसोर्ट एवं रेस्टोरेंट के सामने यह होटल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है | जाड़े की धुप में मैं चाय पीकर थोड़ी देर समाचार पत्र देखने लगा | भोजन का समय हो चूका था सो दूकानदार ने कहा की वो खाना खाने घर जा रहा है | दुकान को जैसे का तैसा खुला छोड़कर वह चला गया | जल्द ही एक आदमी नमकीन और गुटखा लेने आया | उसने मुझसे पूछा तो मैंने कहा की दुकानदार तो खाना खाने गया है | वह आदमी नमकीन और गुटखा लिया और पैसे वही रख दिया | इसके बाद एक लड़की आई उसने भी वही किया | एक ग्राहक के पास खुले पैसे नहीं थे तो वो बिना सामान लिए वापस चला गया | लोगों की इमानदारी मैं देख रहा था | एक राजमार्ग पर जहाँ लोग मोटर साइकिल या कार से आते हैं वहां सामान लेकर स्वयं पैसे रखकर चले जाना मुझे आश्चर्य लग रहा था | लोगों की ईमानदारी मुझे पसंद आयी | हम सबको इससे सीखना चाहिए | राजस्थान की इस संस्कृति को नमन |

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